मोहब्बत
mohabatt
Sunday, December 21, 2014
शहीदो के नाम
सरहदें
नहीं
बाटी
,
लड़े
वो
देश
की
खातिर
वो
जीत
तभी
जाते
,
मगर
कुछ
अपने
ही
थे
शातिर
हमने
तो
उनकी
मौत
को
अपनी
जिंदगी
से
ज्यादा
निहारा
है
उनका
कल
तो
गुलामी
में
ही
कटना
था
वो
शहीद
हुए
हमारे
आज
की
खातिर
.
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