Wednesday, December 14, 2016

मुखिया

5 पायजामे है पर 2 मे नाड़ा नही है।
एक फटा है दूसरा आता नही है।
रोज पहनता हूँ और धो लेता हूँ। 
इसके सिवा कोई चारा नही है।

अकेले कमाना है और पाँचो को खिलाना है।

Wednesday, December 7, 2016

बहुत छोटी सी दूरी थी , वर्षों लग गये  गुजर जाने में
सब कुछ लूटा बैठा में महोब्बत के हरजाने में
अब बहुत दूर है ठिकाना उसका मेरे ठिकाने से
बस चंद यादे है बाकी अब मेरे खजाने में।

Tuesday, December 6, 2016

माँ का खत ईश्वर को

छोटी छोटी लकड़ी चुनकर जब जल्दी जल्दी घर आती थीं 
छोटे छोटे हाथों से लिखता था वो कुछ, मै खुश हो जाती थीं 
जब मै रोटी बनाती वो पास आके दिखाता तकती अपनी 
सूंदर सा सफ़ेद सा कुछ लिखा होता था , मैं पढ़ नहीं पाती 
वो रात को हर रोज पूछता मुझसे की इन सितारों में पापा कौन से है 
इतनी गरीबी थी गुजर बसर करने में पर वो दौलत था मेरी 
आधा जंगल बीन लिया उसकी खुशियों के लिये 
अब बड़ा हो गया और में बूढ़ी  हो गई 
अब वो पढ़ कर विदेश चला गया 

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आँखे अब कम खुलती है, सुनता भी कम , दिखता भी कम है 
सुबह उठकर रोज पक्की सड़क तक जाती हूँ ,, दूर तक देखने 
लौटते लौटते शाम हो जाती है , कितने साल हो गए सिर्फ मै ही जानती हूँ . 
अब समय बहुत थोड़ा बचा है और बेचैनी बहुत बढ़ गयी 
दुआ हर पल यही दुआ तुम से मेरे  ईश्वर 
    अब लौट  आये , अब लौट  आये।  
 
                                                                                                                माँ 

Monday, November 21, 2016

अब शायद मुझसे नहीं.

अब शायद मुझसे नहीं , पर कभी मेरे किसी काम से तो मिलोगे।  
अब शायद मुझसे नहीं , पर कभी मेरे किसी नाम से तो मिलोगे।    
          बदलने में समय लगता है कोयले को हीरे में।  
अब शायद कोयले से नहीं , पर कभी उँगली में अपनी किसे हीरे से तो मिलोगे। 

Thursday, November 3, 2016

फर्क

शास्त्रों के हिसाब से ,पापियों और भ्रष्टाचारियों के गुणवान सन्तान नही हो सकती फिर भी देश इन्ही के हाथों मे देश था। अब नहीं हैं, दिक्कतें तो सब को होगी।

Monday, February 2, 2015

देखा है.

बहुत सरल है पता लगाना .
मैने किस -किस संग तुम्हे देखा है.
कभी दिखे तुम राधा संग.
कभी मीरा संग तुम्हे देखा है.
घूमा में सारी बृज की गालिया,
सोचा तुम गय्या चराने आओगे.
खुद को बनाया कुरुक्षेत्र की भूमि,
सोचा तुम महानायक बनकर आओगे.
ढूंढ रहा हूँ, तुम्हे कब से केशव,
कैसे तुम्हे में पाऊगा,
लौट आओ धरा पर मोहन
 कैसे गगन में, मै आउगा.
कभी दिखे तुम शेषनाग पर.
कभी राधा घाट पर देखा है.
कभी दिखे तुम राधा संग.

कभी मीरा संग तुम्हे देखा है.

Wednesday, January 21, 2015

कर्त्तव्य

कितनी मेहनत कर माता ने, ममता को भगवान बनाया.
 पिता ने जेठ दुपहरी, माथे का पसीना देखा नहीं.
       तेरे सपनो का संसार बनाया .
 खुद के लिए बस मांगा तुझ को और,
    सब पाकर भी तुझ पे लुटाया..
हर खवाहिश को पूरा कर दिया, सोचा नहीं तूने कभी जीने.
अब बारी है कलयुग तेरी, पूरा कर तू उन्हें बिना गिने.........